tag:blogger.com,1999:blog-26205632.post-1161132942916407492006-10-17T20:44:00.000-04:002006-10-17T20:59:03.100-04:00मैनहटन-२सितम्बर की उमस भरी रात में<br />'मैनहटन'<br />परेशान सा लग रहा है!<br />मैं जब भी रात में<br />अपने कमरे की खिडकी से<br />बाहर देखता हूँ<br />तो 'मैनहटन' को<br />जान-बूझकर<br />नज़रअंदाज़ करता हूँ.<br />हाँ, कभी-कभी कनखियों से<br />निहार लिया करता हूँ.<br />अगर 'हडसन' के साथ<br />बातें करने में मग्न हुआ तो<br />वह भी मेरी तरफ़<br />ध्यान नहीं देता.<br />मगर आज<br />दिन भर सूरज की किरणों का ताप झेलकर<br />थकी-हारी<br />'हडसन'<br />'मैनहटन'<br />की ओर<br />पीठ करके<br />लेटी हुई है<br />उस मज़दूर औरत की तरह<br />जो<br />दिन भर कडी धूप में<br />सिर पर ईंटें ढोने के बाद<br />कमर सीधी करते ही<br />ऊँघने लगती है.<br />शायद इसीलिए<br />'मैनहटन'<br />बौखलाया सा लग रहा है.<br />मैं शायद बताना भूल गया,<br />पिछले कुछ महीनों में<br />इतनी तो जान-पहचान<br />हो गई है कि<br />'मैनहटन'अब मुझे<br />'इन्टीमिडेट'<br />नहीं करता.<br />इसी वजह से अब<br />ज़्यादातर<br />खुली रहने लगी है<br />मेरे बेडरूम की खिडकी.<br />क्या पता आ ही बैठे<br />वह<br />कुहनी टेककर<br />मेरी खिडकी पर.<br />बातें तो बहुत सारी<br />करनी है<br />'मैनहटन'से,<br />पूछने हैं कई सवाल<br />जानना है<br />कईयों का हाल.<br />शायद बता ही दे वो<br />उस बुढिया की कहानी<br />जिसका<br />'मेडन लेन' की दुकानों<br />की सीढियों पर रैन-बसेरा है.<br />शायद पता हो उसे<br />'वर्ल्ड ट्रेड सेंटर'के सामने<br />अखबार की प्रतियाँ बाँटने वाली<br />अश्वेत महिला की आँखों से टपकती<br />लाचारी का कारण.<br />क्या पता सुना ही दे<br />कॉफ़ी-बेगल का ठेला लगाने वाले<br />'मार्क' के युवा बेटे के<br />सपनों की दास्तान.<br />'सी-पोर्ट' पर बैठने वाले<br />बूढे भिखारी की<br />मैली-कुचैली पोटली<br />का राज़ ही खोल दे शायद.<br />या कह उठे संघर्ष-गाथा<br />अपनी साइकिलों के कैरियर पर<br />पिज़ा-बर्गर<br />और न जाने क्या-क्या<br />'डिलीवर' करते<br />'हिस्पैनिक' पुरुषों की.<br />'डव-जोन्स','नॅस्डॅक' और 'एस एण्ड पी ५००' के<br />उतार-चढाव,<br />९-११ के हमलों में मारे गए<br />लोगों कि फ़ेहरिस्त,<br />संयुक्त राष्ट्र महासभा की<br />बहसें और प्रस्ताव,<br />'टाइम्स स्क्वेयर' के<br />चौंधिया देने वाले होर्डिंग<br />'ब्रूकलिन-ब्रिज' के<br />सवा-सौ सालों के इतिहास<br />और<br />'सेंट्रल पार्क' के क्षेत्रफल<br />के अलावा<br />इन सारी बातों की<br />जानकारी<br />भी रखता तो होगा<br />'मैनहटन'!भारत भूषण तिवारीhttp://www.blogger.com/profile/12706567132548135848noreply@blogger.com